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करन्सीनां टोळामां
हारबंध उभवानी टेव साली जाय नहि
अने आ रुपियानी भूख पूरी थाय नहि
पटारे पडेला रुपियाने व्हाइमां फेरववा केम?
लटकती रुपियानी मूंछडीनो भांगी ग्यो वहेम
रोकडी खनखनती मूडीनो मेळ क्यांय खाय नहि
हारबंध उभवानी टेव.....
रोज रोज देखाय छे टोळांमां अोगळतो माणस
मांड मांड मल्युं छे जीववानुं धूळधोयुं चानस
घेटां सम दोरातो जाय,गोवाळ क्यांये देखाय नहि
हारबंध उभवानी टेव......
खोटानुं साचुंने साचानुं खोटुं एवा खेलाया खेल
पाघडीनो वळ आवे छेडे,हाल नाखी छे टेल
जोजे,आ टेकसफ्री मळेेली उंघ पाछी जाय नहि
हारबंध उभवानी टेव....
डॉ. भावेश जेतपरिया
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