घंट वाग्यो ने छोकरा आव्या
ऐ गले बांधी घूघरा आव्या
वेद ,विस्मय,नमन ने हितैषी
दीप,रचना,गिरा,धरा आव्या
पंखीओ ने पतंगिया आव्या
साथे मेडम ऐ अक्षरा आव्या
मोजथी तोय ऐ थयुं पर्यटन
मार्गे कांटा ने कांकरा आव्या
स्वप्न आव्युं बधा य ने ऐवुं
विश्व आखुं फरी जरा आव्या
.भरत भट्ट
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