Sunday, 9 April 2017

ગઝલ

आपके मनमें दबी वो बात सारी बोलदो,
क्या परेशानी है तुमको राज सारे खोलदो।

हमने है तुमसे निभाइ दोस्ताना रस्मो राह,
ओर तुम अब अपनी यारा बे वफाइ छोडदो।

हम चले हैं  चाहतों की करके तुमसे आरजु,
रोकने वाली कदम को हर बला को तोडदो।

आपकी उल्फत को हमने जिंदगी  माना सदा,
आपने तोड़ा है हमसे वास्ता वो जोडदो।

इतने आगे बढके हम क्युं हटें पीछे बता,
बे सबब मासूम अमली फेंसलों को मोडदो।

                 मासूम मोडासवी

No comments:

Post a Comment