*-:||:- सांगा सुडतालीसी -:||:-*
*(छंद:- सोरठा)*
(नोंध:- जे दुहो न समजाय एनो नंबर मने जणाववा विनंती)
राणा माथे रंग, ढोळी नाखो धारिया
बाबर केरु ब्रंग, सख नो ल्ये संग्रामसिंह *(१)*
भारत रो तुं भीम, महाबली मेवाड रो
हांफी जाय हकीम, साचवता संग्रामसिंह *(२)*
नर केरा इक नेत्र, नाखे मेवाडे नजर
क्षण क्षण हरदम क्षेत्र, साचवियु संग्रामसिंह *(३)*
भारत पर भेंकार, दखवाळुं भावि दिठुं
तजी बधुं तैयार, समर गियो संग्रामसिंह *(४)*
भोम खमे नय भार, जोधा जडबातोड ज्या
खानवामां खुंखार, सामो ग्यो संग्रामसिंह *(५)*
सूर्यवंश रो सूत, राणा इ रायमल तणो
भाळ्या यवनो भूत, सारंगपुर संग्रामसिंह *(६)*
कुंभा केरो पौत्र, वेजवापायन सत वदा
गेहलोतोनुं गौत्र, साचुं ई संग्रामसिंह *(७)*
मनको लेता मोत, शमणा हिंद स्वराज रा
जागी पाछी ज्योत, संजीवनी संग्रामसिंह *(८)*
माणत जाजी मौज, संधी बाबर सह करी
खत्री तारी खोज, स्वराज्य संग्रामसिंह *(९)*
बप्पा जेवा बाप, नर शूरा सिसोदिया
अंश महाना आप, सांकळ थइ संग्रामसिंह *(१०)*
जंग दिखावे जोम, दर्शन बस दुश्मन करे
राती रोमे रोम, सह भूमी संग्रामसिंह *(११)*
अणगत हो आकाश, टमटम फिक्का तारला
पण झळहळ परकाश, सूरज द्ये संग्रामसिंह *(१२)*
भारत केरी भोम, साचा हिंदू सूत सब
कनडे जब परकौम, सांखे नइ संग्रामसिंह *(१३)*
धर केरा ध्रम ध्वंस, एक धजा इस्लाम री
कनडे यवनो कंस, श्याम हुओ संग्रामसिंह *(१४)*
चातक भारत चोट, प्यासी हिंदू पूत री
दीधी राणा दौट, साद पडे संग्रामसिंह *(१५)*
गभराया विण ग्रास, लख लख वारे लूंटता
वहमो बन्यो व्यास, शायर पर संग्रामसिंह *(१६)*
लोदी री गइ लाज, बैठ गियो बाबर जबै
बन्यो त्यारे बाज, सर्प उपर संग्रामसिंह *(१७)*
तब आवे तुफान, काबुलथी काफर कही
भुल्या भूपत भान, स्मरण रखे संग्रामसिंह *(१८)*
खासा थ्येला खट्ट, खंडेरो खत्री बधा
वर्ते अणनम वट्ट, सचराचर संग्रामसिंह *(१९)*
वडा वडा सब वात, खडा खडा खत्री करे
अडाभडा आयात, सदा लडा संग्रामसिंह *(२०)*
लालच काजे लूंट, बडी बडी बाबर करे
छण नो द्यो पण छुट, सदंतरे संग्रामसिंह *(२१)*
अकबर बाबर अंश, पौत्र तम परतापसिंह
वाह तिहारो वंश, साचो ई संग्रामसिंह *(२२)*
गयो जुध गागरोन, मेळव्यु तब माळवा
महमद खिलजी मौन, शुं करे संग्रामसिंह? *(२३)*
आवे बाबर आज, मजो होय मेवाडमें
लेश जती नय लाज, सरहद पर संग्रामसिंह *(२४)*
बानी मांही बुद्ध, कितनोको दी यह कला
जुजने शिखवे जुद्ध, सरस्वति संग्रामसिंह *(२५)*
गण्या कैंक गुलाब, यवनो केरा कर महीं
आर्याव्रत रा आप, सरोज हो संग्रामसिंह *(२६)*
चकचूरो सब चूप, छाजे छबछबिया करी
भद्र वदियो भूप, समदर तुं संग्रामसिंह *(२७)*
ओछी थइ इक आंख, वडा भ्रात विवादको
रति न लागे रांक, समर्थ नर संग्रामसिंह *(२८)*
न्रेश वैशाख नोम, पंदर उनचालिसमां
भारत केरी भोम, सदा रुणी संग्रामसिंह *(२९)*
शुक्ल पंचमि ज्येष्ठ, पंदरसो छियासठे
समर्थ एवम् श्रेष्ठ, सांमी थ्यो संग्रामसिंह *(३०)*
पालक अत्ति प्रबल्ल, आसपास रा एक भुप
दाखे नहीं दखल्ल, सामे तम संग्रामसिंह *(३१)*
आबू रुं अजमेर, ग्वालियर बुंदी गांगरोन
तेवा बारह-तेर, सामंतो संग्रामसिंह *(३२)*
पंदरसो चिहोतरम्, इब्राहिम चड आविया
देखाडेलो दम, संग्रामे संग्रामसिंह *(३३)*
सांगा त्हारो सेल, लक्ष्य माथे लागतो
खांडा केरेे खेल, समोवडो संग्रामसिंह *(३४)*
मान्डुनो महमूद, ग्रासे चड्यो गांगरोन
महाबली मजबूत, सामो थ्यो संग्रामसिंह *(३५)*
बाळक थी लई ब्रद्ध, बेठो नइ भड बे घडी
जीवन आखु जुद्ध, सतत कियु संग्रामसिंह *(३६)*
ईडर माटे ओट, निजामुल्मुल्क नाथ थ्यो
खत्री सहे न खोट, सहाय की संग्रामसिंह *(३७)*
लोदी सेना लाख, खातोली रा खेतरे
पींखी नाखी पांख, सेना खग संग्रामसिंह *(३८)*
बाबर लोदी बेय, मुल्ला असुर मैदानमां
लोदीथी जय लेय, सर मुघल संग्रामसिंह *(३९)*
मुघला रुं मेवाड, आमसामने आविया
खानवा थ्यो खणणाट, समरांगण संग्रामसिंह *(४०)*
हाडे पुरा हाम, जोश लगायो जंगमे
हर हर अल अल नाम, शोरबकोर संग्रामसिंह *(४१)*
हणी घणा थइ हार, हार छता तुं छाजतो
तोप वडे तकरार, शा कर सर संग्रामसिंह *(४२)*
तापे होय तरस, भड रुधीरनी भोमने
बिग्रह छियालिस बरस, सतत कियो संग्रामसिंह *(४३)*
करी पुरी कोशिश, हरदम हिंदुराजनी
सदा रखावे शिश, सर्वोदय संग्रामसिंह *(४४)*
चारण आजे चंद, खुशामतुं खोटी करे
फळ दउ फतेयमंद, श्र्लाध्यने संग्रामसिंह *(४५)*
अणनम आबेहुब, कुळ तारा थ्या केटला
खत्री शोभे खुब, श्री भारत संग्रामसिंह *(४६)*
नरपत हिंदु नाथ, भेळा क्यारे भेटशो
सुडतालिसी साथ, स्वर्गे हो संग्रामसिंह *(४७)*
*-कवि धार्मिकभा गढवी रचित*
*संपर्क:-9712422105*
No comments:
Post a Comment