Thursday, 11 May 2017

ગઝલ

पैरों में घुंघरू तेरी यादों के है पहने सनम,
बोल  ऐसी दीवानगी लेकर कहाँ जाये....!!

हम तो बैठे है तेरे दर पे दामन थाम के,
तन्हा दिलकी हैरानगी लेकर कहाँ जाये....!!

गम को बना दिया हमने  विसाल ए सनम,
प्यार में तेरी परवानगी लेकर कहाँ जाये....!!

बेगैरत होकर निकले तुम मेरे रास्तों से
हम तेरे जैसी आवारगी लेकर कहाँ जाये...!!

खुदा मानके तुझे खुद को भूल गए थे,
सनम हम ऐसी बेचारगी लेकर कहाँ जाये...!!

रूपाली चोकसी "यश्वी"

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