उनके हमारेदरमीयां इक फासला रहा,
इतने करीब रहेके भी ना वास्ता रहा।
चलती रही है उनसे इशारो में गुफतगु,
ऐसे हीचाहतों काजोबना होसला रहा।
महेफीलमें सबकीशोखनिगाहें लगीरही
हर इक नफस पे जादुचडा बोलता रहा
कैसे निजात पाये कोइ इस हीसार से
जीनेकी हसरतों का नशा घोलता रहा
वकते खुमार बनके जो छाये रहे यहां
हर सीम्तबे खुदीका असर डोलता रहा
मासूम महोबतसेभला जो सीला मिला
पल पल मसर्रतों से हमें जोडता रहा।
मासूम मोडासवी
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