तेरी मेरी बातों मैं रिश्ता बढ़ता गया,
सुनकर तेरी नादानीयां हसता गया।
माया में बंधा अपना तन मन भूला,
अनदेखी डोरी से जैसे खिचता गया।
यादों के बादल छाये बारिश बनके,
बह निकला तेजीसे कि सब सुनता गया।
रातों को सितारों मे तुम्हें ढुंढा,
बातें कैसी चाहत मेरी खोता गया।
किस्सा मेरा भूलाकर चल दिए तो,
आसमां भी तेरे बिना रोता गया।
"काजल"
किरण पियुष शाह
२८/१०/१७
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