Saturday, 4 November 2017

ગઝલ

शाम के वक़्त जाम याद आया
कितना दिलचस्प काम याद आया

जब भी देखा कोई हसीं चेहरा
मुझको तेरा सलाम याद आया

सुनके क़िस्से ख़ुदा की अज़्मत के
आदमी का मक़ाम याद आया

बंसरी की नवा को तेज़ करो
आज राधा को श्याम याद करो

सहन-ए-मस्जिद में भी हमें 'मोहसिन '
मयकदे का क़याम याद आया

- मोहसिन नकवी

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