गझल
मननी भीते जात तारी खोडमां;
होय कामण गारी ईच्छा दोडमां.
रोज पीछो हुं-ज-तो मारो करु,
ने दगो दै जाउ मोडेमोडमां.
गीत गझलो कागळे लखतो रह्यो,
जिन्दगी जीती जवानी होडमां.
हाथ खुल्ला थै गया छे अंतमां,
कैं क ने कंई पामवाना कोडमां!
कोण उतारे "नफस"ना थाकने;
आप छो हर रोज दोडा दोडमां!
_//नरेन्द्र मकवाणा "नफस"
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