केम आ वातावरण गरमाय छे ?
शुं ? हवामां ओढणी लहेराय छे!
याद तारी बारीऐ डोकाय छे
ने ह्रदयनो खालीपो धोवाय छे
ऐक पगलुं खासमां संताय छे
ऐने जोवा गाम आखुं जाय छे
झाडनी लीलाश ओछी थाय छे
ऐक पंखी डाळ छोडी जाय छे
मारी भीतर पण कडाको थाय छे
वीजळी ज्यां आभमां अंकाय छे
ऐज रीते हुं हवे आगळ वधुं
जेम सरिता प्हाडथी रेलाय छे
कोई खोलो भीतरी पोलाणने
ऐक गेबी शब्द क्यां अटवाय छे?
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