कातिल सी आंखो में प्यार भी है
समंदर भी है
समंदर में कुछ गहरी ख्वाहिशे भी है
साजिशे भी है
साजिशों में कुछ खास अपने भी है
सपने भी है
सपनों में कुछ ख्वाब अधूरे भी है
कुछ अनगिने भी है
अनगिने सपनों में कुछ आसमान में भी है
कुछ जमीं पर भी है
कुछ जमीं के सपनें आंखो में भी है
कुछ दिल में भी है
और दिल मेरा उसके पास भी है
कुछ जज्बात में भी है
~ ~ ~ बावरीकलम ~ ~ ~
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