Saturday, 29 April 2017

ગઝલ

कातिल सी आंखो में प्यार भी है
समंदर भी है
समंदर में कुछ गहरी ख्वाहिशे भी है
साजिशे भी है
साजिशों में कुछ खास अपने भी है
सपने भी है
सपनों में कुछ ख्वाब अधूरे भी है
कुछ अनगिने भी है
अनगिने सपनों में कुछ आसमान में भी है
कुछ जमीं पर भी है
कुछ जमीं के सपनें आंखो में भी है
कुछ दिल में भी है
और दिल मेरा उसके पास भी है
कुछ जज्बात में भी है
~ ~ ~ बावरीकलम ~ ~ ~

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