नही काला नही गोरा वो हम जैसा ही होता है,
बुरा, अच्छा यहाँ पैसा तो बस पैसा ही होता है.
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यँहा में रोज गिरता हु, में उठके फिरसे चलता हूं,
ये सब तो रोज मेरे साथ हमेंशा ही होता है.
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पढ़ाई तुम नही करते वो गलती क्या हमारी हे?,
यंहा अक्षर जो हे काला वो क्यूँ भैसा ही होता है?.
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चलो तुमको बताता हूं कि ये भगवान कैसा है,
जो जैसा सोचता हे बिलकुल वो वैसा ही होता है.
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कँही आता नही जाता, नही हँसता, नही रोता,
यहाँ तो हाल सबका प्यारमे ऐसा ही होता है.
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मित्र राठोड
Tuesday, 27 June 2017
ગઝલ
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મિત્ર' રાઠોડ
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