Wednesday, 28 June 2017

ગઝલ

उनका खयाल उनकी तमन्ना लीये हुवे,
बैठे हुवे हैं राहो में अरमां  लीये हुवे।

कीतनी सता रही है जमाने की तल्खीयां,
आना है साथ तुमको दरमां लीये हुवे।

दिल से लगी उमीद  है उनके विसाल की,
आना है उनको वस्ल का सामां लीये हुवे।

दीदे तलब का मन में है जज्बा जगा हुवा,
उनके करम का दिलतो है इमकां लीये हुवे।

दिलमें बसी रही उन्हैं पाने की आरजु,
दिल ये बना के बैठा है महेमां लीये हुवे।

खोये हुवे खयाल से बाहर तो आवो मासूम,
आया नसीबा साथ में कुछ पीनहां लीये हुवे।

                     मासूम मोडासवी

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