Friday, 14 July 2017

ગઝલ

कोई सुता वेत जागे
भूखथी भरपेट जागे

श्वास साथे जाव ऊंडे
भव्य वेशे भेख जागे

तुं तपासी ले गझलने
तारो त्यां उल्लेख जागे

ऐ तने जोया करे छे
तुंय जो संकेत जागे

एक सूकी डालखीमां
टहूकाओ प्रत्येक जागे

शीशी खोली सुई जाओ
बाद ऐनी म्हेक जागे
    ---धर्मेश उनागर

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