Monday, 17 July 2017

ગઝલ

(૨૪)
*गजल*    
गाते  गाते लोग     चिल्लाने   लगे है ;
राम जाने क्या  वो  अब   गाने लगे है |

जिनसे था बावस्ता    મેરા बरसों तलक ;
वो ही मुजसे दूर  अब   जाने   लगे   हैं |

भूलकर   जिनको   न    भुला उम्रभर ;
बारहा   अब   वो  યું  याद   आने   लगे   हैं |

बात જો लेकर अलग हम दो हुए ;
लोग  वो  ही   बात  समजाने  लगे    हैं |

पास તુમ  રખો લો યહ जूठी   वफ़ा ;
ફાલતુ इन  जज्बों से  अकुलाने  लगे   हैं |

मेरे मरने   की    खबर   लोगो   में  अब ;
दोस्त  दुश्मन   बनके   फ़ैलाने   लगे  है |

            *दिलीप वि घासवाला*

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