(૨૪)
*गजल*
गाते गाते लोग चिल्लाने लगे है ;
राम जाने क्या वो अब गाने लगे है |
जिनसे था बावस्ता મેરા बरसों तलक ;
वो ही मुजसे दूर अब जाने लगे हैं |
भूलकर जिनको न भुला उम्रभर ;
बारहा अब वो યું याद आने लगे हैं |
बात જો लेकर अलग हम दो हुए ;
लोग वो ही बात समजाने लगे हैं |
पास તુમ રખો લો યહ जूठी वफ़ा ;
ફાલતુ इन जज्बों से अकुलाने लगे हैं |
मेरे मरने की खबर लोगो में अब ;
दोस्त दुश्मन बनके फ़ैलाने लगे है |
*दिलीप वि घासवाला*
No comments:
Post a Comment