Saturday, 1 July 2017

ગઝલ

घने  बादलों  की  जडी आ गइ है ,
हवाओं में कितनी नमी आ गइ है।

उन्हें साथ लेकर चलना है लेकिन,
मगर  चाहतो  मे कमी आ गइ हो।

मेरी हसरतें मुजको बहेला रही हैं ,
इरादों में अब  बरहमी आ गइ है।

तुम्हारी कसममुजको दुरी सताये,
ये हालत मेरे सर बडी आ गइ है ।

इरादे  हमारे  हैं मजबुत  फीरभी ,
मुखालीफजहां कीगमी आ गइ है।

वफाऐं निभाने का अरमां इतना,
रहा दिल में पर बेबसी आ ए है।

चलो आजमासूम नये ख्वाब देखें,
नये दौर की फीर घड़ी आ गइ है।

                      मासूम मोडासवी

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