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[ मालोपमा अलंकार ]
( लक्षण, दोहा )
उपमेय एक ज छतां, होय घणां उपमान,
माल उपमा मानीये, 'चमन' आज पहेचान.
( उदाहरण, मनहर कवित )
अगन पे नीर जैसे, पापीयां पे पीर जैसे,
दीप पे समीर जैसे सापन पे मोर है,
तेतरां पे बाज जैसे, वृत देवराज जैसे,
रावन के काज रघुराज धनु डोर है,
शिवजी त्रिपुर पे ज्युं, मुरारी है मुर पे ज्युं,
जोगनी असुर पे ज्युं घात कीनी घोर है,
कान अही फेन ज्युं, द्विज छत्री सेन पे ज्युं,
तैसे कौरवेन मथ्थे पार्थ शिरमोर है.
कवी - चमन गज्जर
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