आखिर तेरी चाहत है दीवार की तरह
चाहत की चाह मे हुए बीमार की तरह।।
कायल बना तेरी दलीलों से हरदम युहीं,
परेंशा कीया तुमने कहके इकरार की तरह।।
जज्बातों का इजहार हुआ अखियों से सदा,
गुल खीलें मुहब्बतों के गुले गुलजार की तराह।।
मांग लिया साथ हमने सदीयों का तकदीर से,
खुशीयाँ बांटते चले सब को यार की तराह।।
वादों का कारवां बनता रहा हर मुलाकात में,
काजल दिवानी भईँ प्यारमें अहंकार की तराह।।
"काजल"
किरण पियुष शाह
२८/१०/१७
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