सुरत पे तेरी सब देख बहारों की खुशी है,
फीरभी तेरीचाहत मेंभला कितनी कमी है।
तुमने है इनायत का भरम पाल के रख्खा,
रगबत मेरी उल्फत से भरी देख वसी है।
मिलजुल के तेरे साथ जीये जानेकाअरमां,
खारों से मगर ये राहे महोबत तो भरी है ।
मिल जाती मुकद्दर से मुजे तेरी रीफाकत,
हस्ती ये हमारी इसी हसरत पे खडी है।
बदले हुवे हालात जुदा कर गये वरना,
पर तेरी इनायत की हमें आस बडी है।
यादों में तेरी हमने सदा गम को निबाहा,
मिलने की बहोत तुमसे तमन्ना तो रही है।
मासूम जिंदगी में रहा कुछ दर्द मयस्सर,
हस्ती तेरी सब रस्म निभाने पे अडी है।
मासूम मोडासवी
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