Sunday, 11 September 2016

गझल

तीक्ष्णने धारदार  अफवा छे
आपणी आरपार अफवा छे

ठिंगणुं   छे  वजूद   कीडीनुं
लांबी - लांबी कतार अफवा छे

जे हवेलीमां आप बेठां छो
ऐनुं ऐकाद द्वार अफवा छे

तथ्यनी आ तरफ ऊभो छुं हुं
तथ्यनी पेले पार अफवा छे

आपणुं ऐक म्होरुं माणसनुं
ऐनी सामे हजार अफवा छे

आदमी, आदमी छे ऐकवखत
आदमी लाख वार अफवा छे

आपणे ओढी ऐ ज चादर छे
जेनो प्रत्येक तार अफवा छे

     भरत भट्ट

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