तीक्ष्णने धारदार अफवा छे
आपणी आरपार अफवा छे
ठिंगणुं छे वजूद कीडीनुं
लांबी - लांबी कतार अफवा छे
जे हवेलीमां आप बेठां छो
ऐनुं ऐकाद द्वार अफवा छे
तथ्यनी आ तरफ ऊभो छुं हुं
तथ्यनी पेले पार अफवा छे
आपणुं ऐक म्होरुं माणसनुं
ऐनी सामे हजार अफवा छे
आदमी, आदमी छे ऐकवखत
आदमी लाख वार अफवा छे
आपणे ओढी ऐ ज चादर छे
जेनो प्रत्येक तार अफवा छे
भरत भट्ट
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