लाश जेवा को'क बळवा नीकळे
ओढवा कफनो त्यां घरडा नीकळे
छे अनोखी मानवी रुपे कबर
जीवता ज्यां फक्त मडदा नीकळे
प्रेमनी आ खीण छे उंडी घणी
मौन भेदी प्रेम पडघा नीकळे
जिंदगीमां तो हसाव्यो ना कदी
बेसणामां ते ज रडवा नीकळे
जीत नक्की होय छे ए जंगमां
मात खुदने दै जे लडवा नीकळे
-गौतम परमार"सर्जक"
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