Thursday, 3 November 2016

गीत

गांधीगीरी गीरी गीरी
डॉ.  भावेश जेतपरिया

क्यां जई करवी गांधीगीरी
चारेबाजु दादागीरी वादागीरी छानागीरी

हवे नथीनुं भूत धूणतुं आपो कापो छापो मारो मारो
ताळां कूची नथी साबूत पींढारानो रोज रहे वरतारो़
फूलीफाली वकरती थै भूंडागीरी मूंडागीरी गूंडागीरी
            क्यां जई करवी गांधीगीरी....

भेणसेळने हाव वधारो पडिके गंधातो माणस सस्ते
आडा बीडे अथडातो अटवातो जडे नहि कोई रस्तो
फफडे तेतर रेढे खेतर- वेतर शकरागीरी लफरागीरी
            क्यां जई करवी गांधीगीरी....

आम जावने अभडावानुं तेम जाव तो दर्दो
खडकी पासे टोळां वच्चे मूंगामंतर थीजी ग्या छे मर्दो
कलाबलाना उडे चीथरां नरसिहमीरा वेचाय तानारीरी
            क्यां जई करवी गांधीगीरी....

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