Thursday, 22 December 2016

બે ગઝલ

पग नथीने तोय  सौ  दोडी   रह्या  छे
आ सडक पर पथ्थरो खोडी रह्या छे

ऐक पण बाबत नथी साची पडी  तो
जन्मथी सपनाओ फांकोडी रह्या छे

दूर देशावर गया छो  आप  धारो  के
लोक त्यां आपने हाथ जोडी रह्यां छे

जागु छुं हुं ,चंद्र पूनमनो य जागे
लोक सौ ऐ चंद्रने तोडी रह्या छे
.
केटलां परवश हता न्होती खबर कैं
बंधनोने   तर्कथी   फोडी  रह्या   छे

.         भरत भट्ट
[12/22, 2:33 PM] Bharat Bhatt: छोडीऐ  घर  ने  ऊंबरो  आवे
प्रश्न अघरो गलत-खरो आवे

प्हेलां परथम तो पथ्थरो आवे
ऐ  पछी  ऊंचा  शिखरो  आवे

आवे छे ऐमनुं स्मरण हमणां
आंखमां आवे तो  झरो  आवे

गाम ऐनुं पछी जो आवे तो
ऐकसो  आठ  खेतरो  आवे

ऐनी वाते समीर सुवासित
मारी वातोथी वायरो  आवे

आडुं-अवलुं जराक बोलुं त्यां
गांधी   बापुनो   वांदरो  आवे

ऐक मींडाने शोधता प्हेलां
सामटा केम अक्षरो आवे

छे बधो ठाठमाठ कीर्तनमां
अंतरायो ऐज अंतरो आवे

               भरत भट्ट

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