रातनो छे खुमार आंखोमां
ऊघडे छे सवार आंखोमां
आंखमां यादनी ऋतुं बेसे
वरसे छे धोधमार आंखोमां
घेनमां आंख डूबती त्यारे
स्वप्न छे बेसुमार आंखोमां
कोई यात्रा करे छे भीतरमां
कोई मारे छे लटार आंखोमां
साचवेला ऐकाद सपनानां -
थाय टूकडा हजार,आंखोमां
क्यां कदी पण जई शक्युं कोई
तीक्ष्ण थई आरपार आंखोमां?
शब्द के मौनथी न समजाये
तो कहेवुं धरार आंखोमां
भरत भट्ट
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