Monday, 23 January 2017

ગઝલ

Gai kale pathan kareli rachana

आपी शके तो आप तुं आधार मौननो
घेरी वळ्यो छे आंखने अंधार मौननो

आखो दिवस हुं भटकुं नगरमां चरण लई
आथमता सूर्य साथे उगे भार मौननो

आ चांदनीमां सपनां य साकार  थै जशे
तारा नणनथी तोड तुं आकार मौननो

कैं केटला युगोथी अमे चालता रह्या
पगलांथी क्यां मपाय छे विस्तार मौननो

उमट्युं छे आखुं शहेर गलीमां ने त्यां जुओ
रस्ता उपर तो दोडे छे संसार मौननो

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