Monday, 23 January 2017

છંદ

.     [ एक अबळा ने कारणे ]
        रचना - चमन गज्जर

              ( दुहो )
मरे तोय मेले नही,     खतरी रीत खचीत,
जीव जाय पण जाय ना, आ रजपूतां रीत.

          [ छंद - हरीगीत ]
संध तख्त राज्यो सुमरो थई काळ जत पर कोपीयो,
उपाडी उचाळा ने हेबत खान जो हाल्यो गीयो,
उंचो थयो छे आभ हेठी हाय धरणी धणधणे,
पडमां लड्या परमार अणनम एक अबळा कारणे. (१)

भाग कीधुं भुज जटकी जाम जाकारो दीयो,
धधकी गयुं तुं ध्रोळ डरथी थीर गोंडल ना थीयो,
मुळी पटाधर मरद भाळ्या भोम हय ज्यां हणहणे,
पडमां लड्या परमार अणनम एक अबळा कारणे. (२)

लीधेल तें लगधीर वोरी वेर पण पाळ्या हता,
परीयां धराव्यां पाणीये ईतिहास अंजवाळ्या हता,
होम्युं कटम लई हवन मां रण खेल खांडां खणखणे,
पडमां लड्या परमार अणनम एक अबळा कारणे. (३)

घरनो थयो तंई घातकी बड घांयजे घात ज करी,
पाणी कवामां नांख्य पापी गाय आमख घा करी,
हर हर समर करी हाक सोढा छुटीया समरांगणे,
पडमां लड्या परमार अणनम एक अबळा कारणे. (४)

रंगे रम्या रजपूत रणमां हाक कर काढी हडी,
अरी दळ वचे जई आफळ्या तलवार नी ताळी पडी,
निज बरद पाळी बंकडा रोकाई ग्या सरवे रणे,
पडमां लड्या परमार अणनम एक अबळा कारणे. (५)

           ( छप्पय )
रणे चड्या रजपूत, जोम जमदुत बछुट्ट्या,
हाक धाक अरीयाण, त्राय तोबां थई त्रुट्ट्या,
अहो आशरा धर्म, कर्म पोत्तां वट पालण,
रण की जानत रीत, नीत निज कुल निभावण,
एक नारने कारणे, मर्द माटी ए जई मळ्या,
कवी 'चमन' दणी पर आज दन, पुजे पाधर पाळीया.

           [ चमन गज्जर ]

No comments:

Post a Comment