अब गले से तेरे लगा ले मुझे,
या सुला दे या फिर जगा ले मुझे;
मैं लकीरों में तो नहीं सामिल पर,
ख्वाब सा आँख में सजा ले मुझे;
थोड़ी नजरों की इनायत कर दे,
चुपके से मुज से तूँ चुरा ले मुझे;
मिट न पायेगा ये उल्फत का जुनूँ,
चाहे जितना भी आजमा ले मुझे,
तेरे होने से है वजूद अपना,
कोई गर शक है तो भुला ले मुझे;
मौत से भी तो पर्दा मुमकिन है,
अपनी आगोश में छुपा ले मुझे!
: हिमल पंड्या
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