Wednesday, 8 February 2017

ગઝલ

गझ़ल

दफतरो लईने तरीका क्यां जशे
पाटीमां पाडेल लीटा क्यां जशे

अश्रुओ टपक्यां अने कहेता गया
आंखमां वावेल सपना  क्यां जशे

पोथी सामे खुद  पंडितजी ऊभा
आ तमारा तर्क-तुक्का क्यां जशे

आप जे सपनाने सलगावी रह्या
ख्याल छे ऐना धुमाडा क्यां जशे

  मध्यमां ऊभा  रहीने पूछशुं
आ ईरादा ते ईरादा क्यां जशे

हुं   तने  जापुं   अने  भूलुं  जगत
शुं खबर के मेर-मणका क्यां जशे

माछलीनी आंख वींधी ना शके
शब्दवेधी ,तीर-भाथां क्यां जशे

               भरत भट्ट

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