कोई भी अपना नजर आता नही।
पास हे जो, दूर क्यु जाता नही।
हो,भले ही,दर्द देता वो,मुजे।
दिल बिना उसके कही भाता नही।
गुनगुना लेता हु,खुद के साथ में।
वो ग़ज़ल में हर जगह गाता नही।
कोन सी चाहत जलाकर हे,गया।
दिल कही भी अब सुकूँ पाता नही।
जिंदगी सोची कहाँ तेरे बिना,
साँस से जैसे रहा नाता नही।
विपुल बोरीसा
No comments:
Post a Comment