Thursday, 23 February 2017

ગઝલ

गझ़ल

शब्द ताता तेज तिखारे रह्या
पंडितोना अर्थ  अंधारे  रह्या

सांकडी शेरी  समावी ना शकी
ऐ बधां सपनाओ विस्तारे रह्यां

पेटना  खाडाने  पूरी  जे  शके
ऐटलां दाणा क्यां कोठारे रह्यां

कोक दी पामीशुं तारा तेजने
ऐम तारा फक्त  विचारे रह्यां

फूल हलवाफूल थई हसतां रह्यां
कंटको  खिल्या  नहीं भारे रह्यां

         भरत भट्ट

No comments:

Post a Comment