Wednesday, 22 February 2017

ગઝલ

आजे पाकिस्तानी कवियित्री नी "तुम भी एक इशारा कर जाते हो तुम भी ना!
कितना कुछ समजा जाते हो तुम भी ना!

देर तलक आँखों से नींद चुरा जाती हो,
फिर सपनो में आ जाते हो तुम भी ना!

अच्छा लगता है जब तुम अपना कहते हो,
एक सुकूँ सा दे जाते हो, तुम भी ना!

दिलमें बन कर याद कोई चुभते हो अक्सर,
आँखों से फिर बहे जाते हो, तुम भी ना!

कैसी कैसी जाल बिछा के देखो अपनी,
बात हमेशा मनवाते हो, तुम भी ना!

रूठ के मुज को रोक लिया जिस को गाने से,
गीत अकेले खुद गाते हो, तुम भी ना!

कहा था मैंने जाने का फिर नाम न लेना,
बात वहीँ क्यूं दोहराते हो, तुम भी ना!

आज तलक जो बाँहो में आकर कहते थे,
बात ग़ज़ल में कहे जाते हो, तुम भी ना!

: हिमल पंड्या

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