*|| कंथ ||*
हरिवर केरी हाटडी, केवो लेशो कंथ?
शयन माथे सुवता, आवे जीवन अंत?
हरिवर केरी हाटडी, केवो लेशो कंथ?
कोमळ एवी कायनी, हरदम राखे खंत?
हरिवर केरी हाटडी, केवो लेशो कंथ?
माळा भेखे मालतो, सरवाळे ई संत?
हरिवर केरी हाटडी, केवो लेशो कंथ?
मुज दिखवे मर्दानगी, गाजे बस गजदंत?
हरिवर केरी हाटडी, केवो लेशो कंथ?
बाजे ज्यारे बुंगिया, पोगे रणना पंथ
*-कवि धार्मिकभा गढवी*
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