Tuesday, 27 June 2017

ગઝલ

काफी एक तेरा हमे अहेसास है
इसि लिये तो ही तुं हरदम पास है

होता ये वहम गर ख्याल तेरा होना 
तो फिर क्यूँ जन्मोसे अधूरी प्यास है

आँख में लीये सदियोका इंतजार
दिल में दबी एक अजनबी आश है

तुझसे ये तडपती धड़कने ज़िन्दा
तुझसे ही तो सांसोका महारास है

मैँ "परम"के पिछे "पागल"बना हूँ
तभी तो ये दिवानापन खास है

ગોરધનભાઈ વેગડ (પરમપાગલ)

No comments:

Post a Comment