Friday, 14 July 2017

ગઝલ

आप जबसे हमारे सनम हो गये |
दुगने तबसे सभी मेरे गम हो गये ||

हम दिवाने नही थे , नही थे मजनु |
प्यार मे हम तुमारी कसम हो गये ||

एक सपना था , मेरे वो होंगे कभी |
वो हमारे ना हुए , जखम हो गये ||

आग तो बूज गई थी कभी प्यारकी |
आँख के आसू फिर क्यो गरम हो गये ||

बनना चाहा "जयेश " जब मैने ईन्शा |
दुष्मन बढने लगे दोस्त कम हो गये ||

-----20-1-02
@ जयेश प्रजापती

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