Wednesday, 6 September 2017

ગઝલ

बन के महेक, मै तेरी सांसो में घुल जाऊं,
दिल करता है, तेरी बाहो में पिघल जाऊं।

सुना है, जाते हो मैखाने में अक्सर,
सोचती हूं, अब पैमाने में ढल जाऊं।

जागना रातभर, अब तकदीर है मेरी,
नींद क्या है, शायद मैं भूल जाऊं।

यूं तो नही घुलती-मिलती किसीसे,
तू मिले तो, शबभर शम्मा सी जल जाऊं।

बड़ी उम्मीदो से पाला है एक ख्वाब को,
तेरी रूह में समाने को मै मचल जाऊं।

...रूह...🌹બીના ગોસ્વામી💐

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