Thursday, 12 October 2017

ગઝલ

बड़ी नाज़ुक है ये मंज़िल मोहब्बत का सफ़र है
धड़क आहिस्ता से ऐ दिल, मोहब्बत का सफ़र है

कोई सुन ले ना ये क़िस्सा, बहुत डर लगता है
मगर डरने से क्या हासिल, मोहब्बत का सफ़र है

बताना भी नहीं आसाँ, छुपाना भी कठिन है
ख़ुदाया किस कदर मुश्किल, मोहब्बत का सफ़र है

उजाले दिल के फैले हैं, चले आओ ना जानम
बहुत ही प्यार के काबिल, मोहब्बत का सफ़र है

-ज़मीर काज़मी

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