Wednesday, 11 October 2017

ગઝલ

तेरा खयाल तेरा तसव्वुर लीये हुवे,
आया हे तेरे पास मुकदर लीये हुवे ।

दो पल की दोस्ती नहीं ये इतना जानले,
बदला है वकत अपना तगय्युर लीये हुवे ।

करवट बदल रही है नये दोर की खुशी,
देखे हे हर निगाह तहय्युर लीये हुवे ।

मिलके सभी से जीना कहेती है जिंदगी,
वो जीना कैसा जीना तकब्बुर लीये हुवे ।

करता है कोन फीकर जमाने मे किसीकी,
सब जी रहे हैं मासूम तफक्कुर लीये हुवे ।

                   मासूम मोडासवी

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