हो चला ये बडा मसअला आजका,
उठ खडा हो गया मरहला आजका ।
युं रचाइ गइ मन घडत साजिशें,
चल पड़ा है येही सीलसीला आजका।
सारे खीदमत के दावे बनावट भरे,
है कहां प्यार का वलवला आजका ।
सब पढाये गये सारे बे काम रहे गये।
सर चढा बोलता मश्गीला आजका।
ये जमाने का दस्तुर बनता गया,
शोर होने लगा बरमला आजका।
इक नइ जिंदगी जो मुहय्या हुइ,
खुब आदम बना मनचला आजका ।
कुदना फांदना खेल मासूम हुवा,
लो बशर हो गया मुब्तीला आजका।
मासूम मोडासवी
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