कुदरत ने तुजको बख्शा है रोशन जमाल हमदम,
रहेने लगा है मुजको तेरा खयाल हमदम।
मिलने की बे करारी इतनी बढ़ी है अबतो,
दिलको सता रहा है तेरा जमाल हमदम।
तेरे बगेर जीना भी लगता अजाब जैसा,
आसां बनादे मिलके तु मेरा हाल हमदम।
तेरी इनायतों का जो दिलने भरम है पाला,
सच करके अपना सपना करदे कमाल हमदम।
बढ़ती चली गइ हैं कुरबत की बे करारी ,
उमीद से भरा हो अपना विसाल हमदम।
दोरे जहां मे कितनी है तंग जिंदगानी,
तेरे सहारे मासूम बने बे मिसाल हमदम।
मासूम मोडासवी
No comments:
Post a Comment