कभी देखे हैं ?
ऐसे दो सयाने ..
जो रात होते ही पागल हो जाते हैं...!
दिनभर दौड़ते रहते हैं जिम्मेदारियों को कंधो पे लादकर..
बखूबी अपना हर काम पूरा करते हैं
मिलते हैं सब से एक मुखौटे के साथ ..
पर जैसे जैसे सूरज ढ़लता है
उनके दिल में उजाला फ़ैलता जाता है
वो खुद के करीब आने लगते हैं..
और फिर ....
निकल पड़ते हैं दोनों
सारे मुखौटे उतारकर ...
इस बनावटी दुनिया से कुछ हसीँ लम्हे चुराने
अपने ख़यालो की दुनिया बसाने..
कभी बिलकुल बच्चे बन जाते हैं .. मासूम बच्चे ..!
तो कभी ..
बेइंतेहा प्यार करनेवाले इश्क़ज़ादे..
जैसे भी होतें हैं ..
एकदूजे के साथ बहुत सच्चे होतें हैं ..
कभी बहुत हँसते हैं ..
तो कभी आँखे नम भी होती हैं ..
और इन्ही छोटे- छोटे पलों में वो सारी खुशियाँ समेट लेतें हैं ..
अपने एहसासों के समंदर में डूबे रहते हैं !
कभी देखें हैं ??!!
~ शबनम
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