Thursday, 20 October 2016

गझल

क्या सुधी लखवुं कहो

शब्दमां ओछुं- वधारे क्यां सुधी लखवुं कहो
कोई भाषाना किनारे क्यां सुधी लखवुं कहो

कोई धारे के न धारे क्यां सुधी लखवुं कहो
नाव डूबी छे किनारे क्यां सुधी लखवुं कहो

आ कलमनी तिक्ष्ण धारे क्यां सुधी लखवुं कहो
आज ऐनाथी वधारे  क्यां  सुधी लखवुं कहो

ऐना नामे आयखुं आख्खुं अमे अर्पण कर्यु
नाम ऐनुं  द्वारे-द्वारे  क्यां सुधी लखवुं कहो ?

ऐक भठ्ठी ऊर्फे जेने आ  जगत  धूणी  कहे
ऐवी धूणीने धखारे क्यां सुधी लखवुं कहो?

हुं विचारोना धुमाडामां ज मूंझाई रह्यो छुं जन्मथी
तर्कना ताता-तिखारे क्यां सुधी लखवुं कहो

पंखी छुं पांखो फूटी रही छे मने ऐवु थतु
पंखी पण पांखो प्रसारे क्यां सुधी लखवु कहो

हुं पुकारु  छुं  गझलमां आपने  बस  आपने
ने गझल तमने पुकारे क्यां सुधी लखवुं कहो

यआंख भीनी थाय तो पीडा विषे लखवु गमे
कोरी आंखोना ईशारे क्यां सुधी लखवुं कहो
    भरत.भट्ट

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