Saturday, 12 November 2016

ગઝલ

खालीपो में ऐम गझलोथी भर्यो
ऐक दरियो खाली शब्दोथी भर्यो

ऐक रीते आयनो  अकबंध  रह्यो
बीजी रीते आखो करचोथी भर्यो

हुं छतां ऐ साव खालीखम रह्यो
में मने पण मात्र वरसोथी भर्यो

आंसुथी पींछी झबोली छे अने
केटला रंगीन  स्वप्नोथी भर्यो

तें मने नखशिख वांचीने कह्युं
जुदा जुदा अर्थघटनोथी भर्यो

          भरत.भट्ट

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