छंद: गालगा लगागागा गालगा लगागागा
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मुज खयालना हदये,आ हिसाब राखी दउ
निंद पांपणे लावी,एक ख्वाब राखी दउ
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अंधकारमा छे तु, एक प्रेम अजवाळुं,
चांद ने कही दिलमा,ए जनाब राखी दउ
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छे नशो नयन तुजनो,प्रेममा हवे मुजने,
आंखमां कहे साखी,हुं शराब राखी दउ
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तुं उठे महेंकी ज्या,प्रेम बागमा मारा,
फूलनो कहे भमरो,हुं शबाब राखी दउ
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होठ छे घणा कोमळ,जेम फूल छे कोइ,
होठ पर कहे माळी,हुं गुलाब राखी दउ,
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छे हसीन 'सर्जक'नी, जेम तुं गजल कोइ,
तुं खयाल शायरनो, लाजवाब राखी दउ
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-गौतम परमार"सर्जक"
Thursday, 1 December 2016
ગઝલ
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