Tuesday, 24 January 2017

ગઝલ

बजने लगी है पांव की झंकार खुदारा,
करने लगे हैं  ख्वाब मे दीदार तुम्हारा

तुमही हमें देखो नजर भरके ऐकबार,
या  करदो हमेंपासमें आनेका  इशारा

बढती लगी बुजादो आकर मेरेहमदम
जलने लगा है दिलमे चाहत का शरारा

कुदरत ने  दिलावेज  सजाइ है बहारें
नजरें मेरी करतीरहींदिलकशये नजारा

इक तेरी कमीने बड़ी हलचल हे मचाइ
मासूम जगादो मेरी कीस्मत कासीतारा

               मासूम मोडासवी

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