Monday, 30 January 2017

ગીત

नीं मैं शरमाइयाँ ...
लटें उलझाइयाँ...
तेरे मिलन की झुस्तझु में ,
खुद से ही नज़रे चुराइयाँ

दो दिलों की प्रित है
हार के भी जीत है,
होता है जब  तुं रुबरू
बजते हवाओँ में गीत है,
नीं मैं थम जाइयाँ.....
धड़कनें सुनाइयाँ....
तेरे मिलन.....

जब जब है तुझको देखती
आँखे ये करती हैं बातें हज़ार ,
डर है मुझको न देख ले
प्रीत को मेरी ये संसार,
हाय ! रुसवाइयाँ.....
होंगी रुसवाइयाँ...
तेरे मिलन...

रात ये रोशन लगे
बादल भी मेरे संग है,
आरज़ू ए दीदार में
बहके हर  अंग अंग हैं,
नीं मैं  महेकाइयाँ...
साँसे महेकाइयाँ...
खुश्बू ये तेरी रूह की,
जबसे है दिल में समाइयाँ...

- शबनम

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