इस लिए रोज दिल उदास रहा,
तेरा हो के भी मेरे पास रहा;
मुद्दतों बाद फिर से महका हूँ,
तेरा चेहरा जो आसपास रहा!
जब से तुमने गले लगाया है,
मुज को हर एक गम है रास रहा;
बस यही है गुमां, ज़माने में,
कोई अपना सा रहा, ख़ास रहा;
तेरी यादों को पहन कर देखा,
फिर तो वो रोज का लिबास रहा.
: हिमल पंड्या
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