कहीं गुरुर है , कहीं गुमान है ,
कहीं किसी की, अलग शान है ,
चहेरे से कहाँ होती है पहचान,
मोहरा पहने हुए हर इन्सान है
कहीं दाव में लगा स्वमान है,
कहीं ऊँचा स्वाभिमान है
स्वजन भी है, कहीं सम्मान भी है
कही बिखरा बिखरा ईमान भी है
-मनन
No comments:
Post a Comment