भीडमां खुद हुं मने पण शोधवा लाग्यो
ऊर्फे ऊंडे ने ऊंडे उतरी जवा लाग्यो
आयनो शणगारवा लाग्यो मने त्यारे
बिंबे तो ऐवुं कह्यु तुं तूटवा लाग्यो
केटली समजण हती केवा हता दिवसो
मारी समजणने बधे समजाववा लाग्यो
कांठे में ऊभा रहीने साद पाड्यो,तो
ऐक दरियो केटलो ऊंडो थवा लाग्यो
पोथीमांथी अर्थ काढ्या केम पंडितजी
शब्दने माथे मूकी हुं नाचवा लाग्यो
. .... ........भरत भट्ट
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