शब्दमां तुं ऐटले आवी वसे छे
कोई तारुं रुप गझ़लोमां कहे छे
हुं तने शोधुं कशे चोपासमां पण-
स्वप्न थई तुं मारी आंखोमां रहे छे
आपणी अंदर रचाता होय शिल्पो
धीमे धीमे शब्द केवुं कोतरे छे
ज्योतिषीऐ हाथ जोयो ने कह्युं के
माछलीओ हस्तरेखामां तरे छे
पेन छे मारी कने तारी आ पींछी
लईऐ टक्कर कोण कोने चितरे छे
भरत भट्ट
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