चोतरफ नीरव अहीं वगडो हतो
मात्र तारा नामनो टहुको हतो
टेकरी वच्चे उगेलां घास पर
क्यांक तारा नामनो पडघो हतो
मन हतुं,मंजिल हती,मुरशीद हतो
हुं हतो , पगलुं हतुं , रस्तो हतो
मारा विना पूर्ण क्यांथी संभवे
हुं अहीं तारा विना अडधो हतो
रुपने नीरख्या कर्यो नीरव बनी
आयनो तो आखरे करचो हतो
भरत भट्ट
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