Tuesday, 3 January 2017

ગઝલ

चोतरफ नीरव अहीं वगडो हतो
मात्र  तारा  नामनो  टहुको  हतो

टेकरी  वच्चे  उगेलां  घास  पर
क्यांक तारा नामनो पडघो हतो

मन हतुं,मंजिल हती,मुरशीद हतो
हुं  हतो , पगलुं हतुं , रस्तो  हतो

मारा विना पूर्ण  क्यांथी  संभवे
हुं अहीं तारा विना अडधो हतो

रुपने नीरख्या कर्यो नीरव बनी
आयनो तो आखरे करचो हतो

              भरत भट्ट

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